आवरण कथा
‘26 अक्टूबर को 'मन की बात' कार्यक्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'वंदेमातरम्' गीत के इतिहास की देशवासियों को फिर से याद दिलाई और राष्ट्रीय गीत 'वंदेमातरम्' के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 7 नवंबर से भारत सरकार की ओर से अगले एक वर्ष तक अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन करने का निर्णय लिया। इन आयोजनों के माध्यम से देश भर में 'वंदे मातरम्' का पूर्ण गान होगा, जिससे देश की युवा पीढ़ी 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' के विचार को आत्मसात कर पाए। ’’
वंदे मातरम्, ये शब्द एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। वंदे मातरम्, ये एक शब्द माँ भारती की साधना है, माँ
भारती की आराधना है। वंदे मातरम्, ये एक शब्द हमें इतिहास में ले जाता है। ये हमारे आत्मविश्वास को, हमारे वर्तमान को,
आत्मविश्वास से भर देता है, और हमारे भविष्य को ये नया साहस देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं, जिसकी सिद्धि न हो सके। ऐसा
कोई लक्ष्य नहीं, जो हम भारतवासी पा न सकें।
वंदे मातरम् के सामूहिक गान का ये अद्भुत अनुभव, ये वाकई अभिव्यक्ति से परे है। इतनी सारी आवाजों में एक लय, एक स्वर, एक भाव, एक
जैसा रोमांच, एक जैसा प्रवाह, ऐसा तारतम्य, ऐसी तरंग, इस ऊर्जा ने हृदय को स्पंदित कर दिया है। भावनाओं से भरे इसी वातावरण में, मैं अपनी बात
को आगे बढ़ा रहा हूँ। मंच पर उपस्थित कैबिनेट के मेरे सहयोगी गजेंद्र सिंह शेखावत, दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
जी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों और बहनों।
आज हमारे साथ देश के सभी कोने से लाखों लोग जुड़े हुए हैं, मैं उनको भी मेरी ओर से वंदे मातरम् से शुभकामनाएँ देता हूँ। आज 7 नवंबर का
दिन बहुत ऐतिहासिक है, आज हम वंदे मातरम् के 150वें वर्ष का महोत्सव मना रहे हैं। ये पुण्य अवसर हमें नई प्रेरणा देगा, कोटि-कोटि देशवासियों
को नई ऊर्जा से भर देगा। इस दिन को इतिहास की तारीख में अंकित करने के लिए आज वंदे मातरम् पर एक विशेष कॉइन और डाक टिकट भी जारी किए गए हैं।
मैं देश के लक्ष्यावदी महापुरुषों को,
माँ भारती की संतानों को वंदे मातरम्, इस मंत्र
के लिए जीवन खपाने के लिए आज श्रद्धापूर्वक
नमन करता हूँ और देशवासियों को इस अवसर
पर बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। मैं सभी
देशवासियों को वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे
होने पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ भी देता हूँ।
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