अनुक्रमणिका

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ध्यान और कर्म का उज्जवल पथ


ध्यान और कर्म का उज्जवल पथ

भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण के साथ वनवास के समय गोदावरी के तट पर पर्णकुटी में निवास कर रहे थे। एक दिन प्रात: काल जब लक्ष्मण कन्दमूल फल लेने वन गये थे, भगवान राम की दृष्टि आश्रम के सामने आम्रवृक्ष पर गयी। उस वृक्ष को अंगूर की लताओं ने आच्छादित कर रखा था। लता में फूलों के गुच्छे खिल रहे थे। जगह-जगह फलों के गुच्छे लटक रहे थे, भौंरे गुंजार रहे थे।

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मन को अपना मित्र बनाए


मन को अपना मित्र बनाए

मन को निर्मल बनाने के लिए हमें सरल बनना होगा क्योंकि सरलता में ही सुख है। सरल बनने के लिए हमें अपनी गोपन प्रवृत्ति को छोड़ना होगा, दोषदर्शन, छिद्रान्वेषण और आलोचना करने का व्यवहार छोड़ना होगा। इसके अतिरिक्त हमारे मन के छल, कपट, संशय, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष आदि भी हमारे मन की कुटिलता और नकारात्मकता को बढ़ाते हैं जिनसे हम तो दु:खी होते ही हैं...

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lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 10

स्कूल तो है शिक्षक नहीं


स्कूल तो है शिक्षक नहीं

एक लाख स्कूलों में मात्र एक शिक्षक और ग्यारह लाख शिक्षकों के पदों का रिक्त होना देश में ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शर्मनाक माना जाना चाहिए। भारत आज इतना संसाधन-विहीन देश तो नहीं है कि वह बच्चों के लिए शिक्षा की समुचित व्यवस्था न कर सके।

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lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 42

पदम् पुराण में श्रीमदभागवत गीता का महाकाव्य


पदम् पुराण में श्रीमदभागवत  गीता का महाकाव्य

शास्त्रों में पुराणों की बड़ी महिमा है। पुराणों को साक्षात् श्री हरि का रूप निरूपित किया गया है। पद्म पुराण को प्रकाशित करने के लिये भगवान् सूर्य रूप में प्रकट होकर सारे बाहरी अन्धकार को नष्ट करते हैं, उसी प्रकार हमारे हृदय-जगत के भीतरी अन्धकार को दूर करने हेतु र्श्रीहरि ही पुराण-विग्रह धारण करते हैं। पुराणों में अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष-चारों का अतिसुन्दर विश्लेषण हुआ है।...

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