महर्षि प्रवाह

श्री गुरुदेव की कृपा का फल
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ब्रह्मचारी गिरीश जी
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गुरु कृपा से इतने जोर का समय आया है, इतना जोर का उबाल आया है, समस्त प्रकृति में इतना उल्लास है जिसका हिसाब नहीं और आज अपने गुरु चरणों का, पादुका का पूजन करके उसको इतनी प्रचुरता से जागृत किया है अपनी चेतना में उसका प्रभाव सारे विश्व चेतना में फैला है। कितने सारी चिट्ठी पत्रों के ढेर के ढेर लगे हैं। लोगों ने क्या लिखा है मालूम है? लोगों ने लिखा है कि हम इस गुरुपूर्णिमा में हम आपके दर्शन नहीं कर सके, हमें आपने दूर रहके क्या उपदेश दिया दूरेदृशं गृहपतिमथर्युम ये उदगार आये हैं हजारों हजारों लोगों के।


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 श्री गुरुदेव की कृपा का फल

समस्त अपने कार्य जो हैं, एक-एक स्तर को बताने वाले एक-एक कार्यक्रम जो अपने हैं, वो इसी से अनुमान लगता है कि अब कल से इतना अधिक सत्व बढ़ा, अब कल से इतना अधिक सत्व विश्व चेतना में बढ़ा, इतना अधिक सत्व विश्व चेतना में हुआ अपने आन्दोलन के कार्यों का और कहीं से भी हम राजनीति की बातें यहाँ वहाँ की सुनते हैं, कोई व्यर्थ की बातें यहाँ वहाँ की सुनते हैं, उससे हमारी चेतना में ये मिलता है कि अभी विश्व चेतना में कितना स्तर है।
कल को ये समाचार मिल जायेगा हमको, जितनी हमको आवश्यकता होती है प्रकृति के द्वारा उतना समाचार हमको मिल जाता है कि उस देश में यह हो रहा है तो हमारी चेतना में स्पष्ट होता है कि इतना सत्व बढ़ गया। सत्व तो बराबर बढ़ रहा है आप ये देखें भारत की समसत शिक्षा पद्धति में ध्यान समाधि का कोई नाम नहीं है, त्रिकाल संध्या वंदन का कोई नाम नहीं है।
सम्पूर्ण देश में ये पाश्चात्य भौतिक विज्ञान की शिक्षा पर आधारित पाठ्यक्रमों के बीच में एक वेद विज्ञान विद्यापीठ का त्रिकाल संध्या वंदन के आधार पर साधना को लिये हुए जो पाठ्यक्रम बना तो मान्यता हो गयी। विश्व चेतना में सत्व का स्तर बनने से और जैसे-जैसे वेद विज्ञान विद्यापीठ के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी वैसे- वैसे विश्व चेतना में प्रतिदिन प्रात: सायं इनके संयम के अभ्यास से वो परत की परत सतोगुण की विश्व चेतना में बढ़ती जायेगी और वो दिन दूर नहीं है जो यहां की शिक्षा पद्धति में जो साधना का तत्व है, जो एक समन्वय तत्व है, जो एक वेद तत्व है, जो एक ये पूर्ण विज्ञान तत्व है। पूर्ण विज्ञान इसलिए कहते हैं कि अपने वैदिक विज्ञान में अध्यात्म अधिदैव और अधिभूति तीनो क्षेत्रों का पूर्ण विज्ञान है इसीलिए सर्वसमर्थता आ सकती है। पाश्चात्य भौतिक विज्ञान में मात्र छन्द तत्व है, मात्र आधिभौतिक तत्व है, इसलिए सम्पूर्ण विश्व की वैज्ञानिक शिक्षा से हमारे वैदिकी संहिता प्रधान, ऋषि देवता छन्द प्रधान शिक्षा लाखों गुणा अधिक प्रभावशाली है।


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