अनुक्रमणिका

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गुरुदेव की कृपा का फल


गुरुदेव की कृपा का फल

गुरु कृपा से इतने जोर का समय आया है, इतना जोर का उबाल आया है, समस्त प्रकृति में इतना उल्लास है जिसका हिसाब नहीं और आज अपने गुरु चरणों का, पादुका का पूजन करके उसको इतनी प्रचुरता से जागृत किया है अपनी चेतना में उसका प्रभाव सारे विश्व चेतना में फैला है।...

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प्रसन्न रहिए और 'भाग्य' की थ्योरी को इस प्रकार समझिए


प्रसन्न रहिए और 'भाग्य' की थ्योरी को इस प्रकार समझिए

हम आज में प्रसन्न नहीं है, क्योंकि हम भविष्य और अतीत में व्यस्त हैं, पहला भविष्य की चिंता और दूसरा अतीत की जकड़न हम भूल गए हैं कि अगर हम आज प्रसन्नता से नहीं जी रहे हैं...

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पढ़ने की इच्छा ने वर्जीनिया पहुंचाया


पढ़ने की इच्छा ने वर्जीनिया पहुंचाया

दृढ़ इच्छाशक्ति की द्वारा जय ने प्रत्येक उस लक्ष्य को प्राप्त किया, जिसे उन्होंने कभी चाहा था। अमेरिका की प्रसिद्ध वर्जीनिया यूनिवर्सिटी ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें पीएचडी का प्रस्ताव दिया। साथ ही, प्रतिवर्ष लगभग 24,000 डॉलर (माह के एक लाख, 40 हजार रुपये से भी अधिक) की छात्रवृत्ति की सुविधा दी गई।...

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पुराणों में इतिहास की पुर्नखोज: पुष्यमित्र


पुराणों में इतिहास की पुर्नखोज: पुष्यमित्र

भारत के गर्व और गौरव का अतीत कालीन इतिहास, विशेषकर ईसा पूर्व का, हमारे सांस्कृतिक और साहित्यिक स्रोतों में दबा पड़ा है। पाश्चात्य इतिहासज्ञों का कथन है कि यह लिपिबद्ध नहीं है।...

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रसायन शास्त्रा


रसायन शास्त्रा

रसायन शास्त्रीय धातु सम्बन्धी व्यापक प्रयोगों के बारे में धातु विज्ञान के वर्णन के समय पूर्व में ही कहा गया है। ये सारे प्रयोग मात्र गुरु से सुनकर या शास्त्र पढ़कर नहीं किए गए। ये तो स्वयं प्रत्यक्ष प्रयोग करके सिद्ध करने के बाद कहे गए हैं। इसकी अभिव्यक्ति करते हुए अनुमानत: 13वीं सदी के रूद्रयामल तंत्र के एक भाग रस कल्प में रस शास्त्री कहता है।...

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आशा की लौ जलती रहे, अंधेरों से क्या डरना


आशा की लौ जलती रहे, अंधेरों से क्या डरना

जब सब कुछ बुरा होते दिखाई दे, चारों ओर अंधकार ही अंधकार नजर आये, अपने भी पराए लगने लगें तो भी आशा मत छोड़िये। क्योंकि इसमें इतनी शक्ति है कि यह प्रत्येक खोई हुई वस्तु आपको पुन: दिला सकती है। इसलिए आशा का दीया सदा जलाये रखना जिससे अन्य बुझे हुए दिये प्रकाशित कर सकते हैं। आशा ही जीवन है, प्रकाश है, कुछ कर गुजरने का साहस है जबकि निराशा घोर अंधकार है।...

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आत्म सम्मान बढ़ाने की ये मजबूत आदतें


आत्म सम्मान बढ़ाने की ये मजबूत आदतें

स्वयं से स्नेह करने को कहने के पीछे कारण यह है कि जब हम स्वयं को स्नेह करने का प्रयास करते हैं तो हममें एक विश्वास का जन्म होता है, जो हमें स्वयं के प्रति सच्चा होने में सहयोग करता है। हममें से कुछ लोगों के लिए यह कार्य सरल है। यदि आप पाते हैं कि आप जो कर रहे हैं या जो कार्य कर रहे हैं, वह मात्र दूसरों को प्रसन्न रखने के लिए है तो आप अपनी आत्मा, अपने होने के वास्तविक उद्देश्य को नकार रहे हैं...

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गीता में ध्यान साधना के सूत्र


गीता में ध्यान साधना के सूत्र

ध्यान-साधक का जागतिक व्यवहार भी परिमित नियमित और उपयुक्त मात्रा में होता है। खाने-पीने, सोते-जागते और कर्म करते हुए व्यक्ति सभी अवस्थाओं में परमात्म से युक्त होता है। संसार में उसे परमात्मा को ही देखना है। यही है, गीता के ध्यान की अवधारणा इसमें ध्यान के साधक की कर्म-फल त्याग की भावना आती है। यही गीता ध्यान योग की विलक्षणता है।...

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श्रीकृष्णार्पणमस्तु शृंखला


श्रीकृष्णार्पणमस्तु शृंखला

कृष्ण का उद्देश्य रहता कि दोषी को दंड तो मिलना ही चाहिये। परन्तु आरोपों की पूरी जाँच किये बिना किसी को भी आरोपी नहीं समझना चाहिए। कृष्ण शतधन्वा और अक्रूर काका को कैसे, कहाँ और कब तक ढूंढ पायेंगे? ढूंढ भी पायेंगे अथवा नहीं।...

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परिवार बचाओ संस्कृति बचाओ


परिवार बचाओ संस्कृति बचाओ

भारतीय संस्कृति सामूहिकता और समूह भावना में विश्वास करती हैं। जब हम समूह भावना में जीवन व्यतित करते है तो हमे अपनं व्यक्तिगत अहं और स्वार्थ को समाप्त नहीं करना पड़ता बल्कि स्वत: ही उनका विलय हो जाता है।...

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