अनुक्रमणिका

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भारत विश्व का सर्वोच्च शक्तिशाली राष्ट्र होगा


भारत विश्व का सर्वोच्च शक्तिशाली राष्ट्र होगा

सरकार की प्रत्येक प्रणाली लोगों को अधिकतम प्रसन्नता देने राष्ट्र में अधिकतम समन्वय लाने के लिए लक्षित है। इसलिए कोई भी राष्ट्र कोई भी सरकार किसी भी रूप में गलत नहीं है जो गलत है वह है कि अन्यों के विचारों का आदर न करना। यदि हम यहां कुछ लाल देखते हैं तो हमें लाल का आनन्द लेने दीजिये एवं यदि कोई किसी अन्य कोण से कहता है कि ??यह कितना सुन्दर हरा है''...

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lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 8

मातृ - पितृ पूजक श्रीगणेश


मातृ - पितृ पूजक श्रीगणेश

''मानहिं मातु पिता नहिं देवा साधुन्ह सन करवावहि सेवा। जिन्ह के यह आचरन भवानी ते जानहू निसिचर सब प्रानी।'' अर्थात जो अपने माता पिता और देवताओं को नहीं मानते और साधुओं से सेवा करवाते है। हे भवानी! जिनके ऐसे आचरण है उन सबको राक्षस ही समझना चाहिये। किंतु आज दिनोदिन बढ़ते वृद्धाश्रमों की संख्या से लगता है कि हमने श्रीगणेश पूजन का सही अर्थ नहीं समझा है।...

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दिव्य गुण क्षमा से पाएँ शांति


दिव्य गुण क्षमा से पाएँ शांति

हम क्षमा के द्वारा स्वयं भी शांति के सुख का अनुभव करते हैं और आस-पास के वातावरण को भी शान्ति से सुखद बना देते हैं। क्षमा एक ऐसा महत्त्वपूर्ण दिव्य गुण है, जिसके दो रूप हैं और इन दोनों रूपों का ही हमारे लिए अत्यधिक महत्त्व है। अपने मन की शान्ति के लिए हमें क्षमायाचना करनी है ....

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रामावतार ही श्रेष्ठ हैं क्यों ?


रामावतार ही श्रेष्ठ हैं क्यों ?

एक दिन भाईयों, पुत्रों, सीताजी तथा गुरु के साथ श्रीरामचन्द्रजी बैठे थे। प्रसंगवश हर्षित होकर श्रीराम कहने लगे, समस्त ऋषिगण, मेरे सब भाई, दोनों पुत्र, सीता, समस्त मन्त्री और माताएँ सब मेरी बात सुनें। मैंने इस अवतार में सीता के साथ जितना सुख भोगा है, उतना किसी भी अवतार में नहीं भोगा। श्रीराम ने कहा कि उन्होंने अनेक कारणों से समयस मय पर अवतार लिए हैं, किन्तु उनकी कोई संख्या नहीं है।...

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