अनुक्रमणिका
पृष्ठ क्र. 6
विश्व चेतना में सत्व का स्तर बनने से और जैसे-जैसे वेद विज्ञान विद्यापीठ के विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी वैसे-वैसे विश्व चेतना में प्रतिदिन प्रात:-सायं इनके संयम के अभ्यास से वो परत की परत सतोगुण की विश्व चेतना में बढ़ती जायेगी और वो दिन दूर नहीं है जब यहाँ की शिक्षा पद्धति में जो साधना का तत्व है, जो एक समन्वय तत्व है, जो एक वेद तत्व है....
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पृष्ठ क्र. 8
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल-2025 देश में कार्य शक्ति, ज्ञान शक्ति एवं विचार शक्ति, तीनों को विकसित करने में सहायक है। इस अधिनियम के अनुसार तीन स्वतंत्र परिषदें बनाने का प्रस्ताव है, जो मानकीकरण, विनियमीकरण और मान्यता देने का काम करेगी। इन संस्थाओं को फंडिंग, वितरण एवं संचालन जैसे कामों से दूर रखा जाएगा।...
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पृष्ठ क्र. 10
हमें इतना सहनशील बनना है कि कोई हमारे साथ कितना भी बुरा करे, किन्तु हम उसके लिए अच्छा ही सोचें। कोई हमें कितना भी बुरा कहे, किन्तु हम किसी के लिए भी अपशब्द न बोलें। कोई भी हमारे साथ कितना ही बुरा व्यवहार करे, परन्तु हम सभी के साथ अच्छा व्यवहार करें; तभी हमारे अंतःकरण में ?हम? का भाव जागृत होगा।
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पृष्ठ क्र. 12
यदि आप अपने मूल्यों के अनुसार जीवन जीते हैं, तो कुछ लोग आपको पसंद करेंगे और कुछ बिल्कुल नहीं। यह मानव जीवन की स्वाभाविक विविधता है। कुछ लोग आपकी आलोचना करेंगे, कुछ आपको डराना चाहेंगे, तो कुछ लोग आपको असफल होते देखना चाहेंगे।
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पृष्ठ क्र. 42
उत्तर-पश्चिमी हवाएँ, बंगाल की खाड़ी से आने वाली गर्म एवं नम हवाओं और उत्तर भारत से आने वाली ठंडी व शुष्क हवाओं की परस्पर प्रक्रिया के कारण वायुमंडल में अस्थिरता पैदा करती हैं। इसी अस्थिरता के कारण कपासी (Cumulonimbus) बादल बनते हैं, जिसके परिणामस्वरूप गरज-चमक वाले तूफ़ान यानी 'कालवैशाखी' का कोहराम मचता है।
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