अनुक्रमणिका

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गुरुदेव की कृपा का फल


गुरुदेव की कृपा का फल

गुरु कृपा से इतने जोर का समय आया है, इतना जोर का उबाल आया है, समस्त प्रकृति में इतना उल्लास है जिसका हिसाब नहीं और आज अपने गुरु चरणों का, पादुका का पूजन करके उसको इतनी प्रचुरता से जागृत किया है अपनी चेतना में उसका प्रभाव सारे विश्व चेतना में फैला है। कितने सारी चिट्ठी पत्रों के ढेर के ढेर लगे हैं। लोगों ने क्या लिखा है मालूम है? लोगों ने लिखा है कि हम इस गुरुपूर्णिमा में हम आपके दर्शन नहीं कर सके, हमें आपने दूर रहके क्या उपदेश दिया।...

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आपने सच्ची प्रशंसा कितने वर्ष पहले की थी


आपने सच्ची प्रशंसा कितने वर्ष पहले की थी

अच्छे कार्य करने वालों का जिक्र अगर हम नहीं करेंगे तो वह विलुप्त होते जाएंगे उनके बचे रहने के लिए, मनुष्यता के लिए ऐसे लोगों की सराहना करें, जो अच्छा कार्य कर रहे हैं इससे कोई अंतर नहीं पड़ता कि वह आपसे परिचित हैं...

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योग के महायोगी


योग के महायोगी

आज भारत के महान वैदिक ज्ञान का महत्व व इसकी महती आवश्यकता का बोध उत्तरोत्तर जाग्रत होता जा रहा है, पूज्य महर्षि जी के अनुसार ज्ञान तो नित्य है, सनातन है परन्तु चेतना पर कुछ आवरण आने से समय के प्रभाव से वह मनुष्य की दृष्टि से ओझल हो जाता है। जिस प्रकार सूर्य तो नित्य प्रकाशवान है। परन्तु बादल आने से ढक सा जाता है।...

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कौन-सा स्कूल भंग करना चाहते हैं इवान इलिच


कौन-सा स्कूल भंग करना चाहते हैं इवान इलिच

अ-स्कूलीकरण पर अनेक विद्ववानों ने शिक्षा के संस्थायीकरण को ध्वस्त करने के अपने तर्क रखे। उन्होंने बहुआयामी, श्रेणीबद्ध और प्रच्छन्न पाठ्यक्रमों पर तीखी आपत्तियाँ दर्ज कीं। बाल-केन्द्रित शिक्षा के तथाकथित क्रिया-प्रधान मुहावरे को खण्डित करते हुए बाल-केन्द्रित शिक्षा को एक प्रकार का छल कहा और यह सिद्ध करने का प्रयास है की कि बच्चों को क्रियाओं के निरर्थक मायाजाल में उलझा कर उन्हें विचार-वंचित या सोचविही न करना है।...

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मन: शिव संकल्पमस्तु


मन: शिव संकल्पमस्तु

भारतीय संस्कृति का आधार केन्द्र शिव तत्व ही है। शिव का अर्थ है। कल्याण, मंगल, हित एवं शुभ इसीलिए भक्त ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहता है कि मेरा मन शिव संकल्प वाला हो। जहाँ शिव है वहीं सत्य है और वहीं सुन्दर भी है।...

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स्वयं पर विश्वास रखो कुछ भी असम्भव नहीं


स्वयं पर विश्वास रखो कुछ भी असम्भव नहीं

एंजला लगभग आठ हफ्तों तक चिकित्सालय में रहीं। फिर उन्हें बेनाला के ओल्ड एज नर्सिंग होम में भेज दिया गया। सभी यही कह रहे थे कि उनका बाकी जीवन अब बिस्तर पर ही बीतने वाला है। किंतु दृढ़ इच्छाशक्ति वाली एंजला को यह स्वीकार नहीं था।...

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श्रीकृष्णार्पणमस्तु शृंखला


श्रीकृष्णार्पणमस्तु शृंखला

कृष्ण समय है। समय का प्रत्येक कण है। क्षण है। इन सबसे आगे प्रबंध है। समय का, व्यक्ति का मित्र का, शत्रु का और उपयोगी लगने वाले किसी भी स्तर के व्यक्ति का उनसे अच्छा उपयोग कोई भी नहीं कर सका। परन्तु यह सब धर्म, धारणा और मयार्दाओं की सीमा में। जिस चक्र के समान वे जीवन भर पूरे आर्यावर्त में चक्रवर्ती का सम्मान प्राप्त कर संघर्ष कर घूमते रहे। मर्यादा के इसी चक्र को कृष्ण ने कभी तोड़ा नहीं। लांघा नहीं।

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