अनुक्रमणिका

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गति का आधार


गति का आधार

'संसरति इति संसार', जिसमें प्रत्येक वस्तु प्रत्येक क्षण गति कर रही हो, स्थिर न हो वह संसार है। नाम में ही संसार का स्वरूप समझा दिया गया है। हम अपने चारों ओर देखें, क्या देखते हैं? बाहर आदमी-पशु चल रहे हैं, साइकि ले, मोटर, बसें, ट्रक दौड़ रहे हैं। लोहे की पांतो पर रेल गांड़ियाँ भाग रही हैं। मनुष्य यहाँ से वहाँ जाने में संतुष्ट नहीं है, वे कम से कम समय में अधिक से अधिक दूरी तय कर लेना चाहते हैं।...

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शुभ संकल्पों से नववर्ष हो सार्थक


शुभ संकल्पों से नववर्ष हो सार्थक

मनुष्य सदैव यही सोचता है कि अभी तो सम्पूर्ण जीवन पड़ा है अभी तो जीवन के सुख भोगो, बुढ़ापे में कर लेंगे अच्छे कार्य। प्रत्येक व्यक्ति इस सत्य को जानता और समझता भी है कि जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है, फिर भी वह मृत्यु को नकारना चाहता है। स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य जी हमें यही समझाना चाहते हैं "आप मृत्यु के उपरान्त अपने साथ अच्छे-बुरे कर्मों की पूँजी साथ ले जाएँगे। इसके अतिरिक्त आप कुछ साथ नहीं ले जा सकते। याद रखें 'कुछ नहीं'। " मन, वचन और कर्म से हमें दूसरों के लिए उपयोगी बनना है, यही वाक्य जब हमारे जीवन का मूलमंत्र होगा।...

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नई शिक्षा नीति के कुछ महत्वपूर्ण पहलू


नई शिक्षा नीति के कुछ महत्वपूर्ण पहलू

शिक्षा का मूलभूत उद्देश्य चरित्र निर्माण है, परंतु आज वह अर्थोपार्जन का साधन बनकर रह गई है यद्यपि अर्थोपार्जन भी उसका उद्देश्य है लेकिन वह यहीं तक सीमित न रहे। युवा पीढ़ी पैसा तो अर्जित करें परंतु उसे मनुष्य बनना भी उतना ही आवश्यक है।...

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रामायण और सिविल इंजीनियरिंग


रामायण और सिविल इंजीनियरिंग

रामायण को वैिश्वक स्तर पर भी मानवीय संवेदनाओं आदर्श व्यवहार, मनोविज्ञान और सामाजिक ताने - बाने को जानने - समझने के एक प्रितिनिधि दस्तावेज के रूप में महत्वपूर्ण माना ही जाता रहा है। इसमें देश -धर्म की कोई सीमा आड़े नहीं आती है। भारत सहित कई अन्य देशों में और विभिन्न धर्मों में भी रामायण से परिचित लोगों की कमी नहीं है। यहाँ इंजीनियरिंग के परिपेक्षय में बस आवश्यकता, रामायण को एक थोड़े से परिष्कृत या एक अलग दृष्टि से पढ़ने और समझने की है।...

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