अनुक्रमणिका

अनुक्रमणिका

lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 6

गुरुदेव की कृपा का फल


गुरुदेव की कृपा का फल

महर्षि जी ने विश्व भर में व्याप्त समस्याओं और संहर्ष की समाप्ति के लिये "विश्व योजना" बनाई जिसके प्रमुख उद्देश्यों में व्यक्ति का पूर्ण विकास करना, प्रशासन की उपलब्धियों को बढ़ाना, शिक्षा के सर्वोच्च आदर्शों को स्थापित करना, समाज में प्रचलित विभिन्न प्रकार के अपराध और अप्रसन्नताकारक व्यवहार को समाप्त करना, पर्यावरण का बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग करना, व्यक्ति और समाज की अर्थ व्यवस्था को पूर्णता प्रदान करना और व्यक्ति के आध्यात्मिक लक्ष्यों की पूर्ति कराना था।...

Subscribe Mahamedia Magazine to Read More...

lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 8

कौन हमें गुस्सैल, दु:खी और बीमार बना रहा है...


कौन हमें गुस्सैल, दु:खी और बीमार बना रहा है...

फेसबुक पर कमेंट को लेकर हत्याओं, विवादों का दौर भारत में प्रारंभ हो सकता है। सोशल मीडिया का परिवर्तित रूप लोग बाजार, घरों पर लेने आ धमके इसलिए समय रहते घर, परिवार विशेषकर बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया की चपेट में आने से बचाना अत्यंत आवश्यक है।...




Subscribe Mahamedia Magazine to Read More...

lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 10

महर्षि ज्योतिष


महर्षि ज्योतिष

महर्षि ज्योतिष की तुलना 'वेद की आँख' से की गई है। हम अपने जीवन में 'आँखों के मूल्य' के बारे में जानते हैं। यह वास्तव में हमारे लिए सभी प्रकाश लाता है। क्योंकि 'ज्योति' भी प्रकाश का मतलब है। इसलिए महर्षि ज्योतिष का ज्ञान हमारे जीवन में और अधिक प्रकाश लाता है। अब भले ही ज्योतिष के इस ज्ञान की अविस्मरणीय समय से भारत के महान संतों की जानकारी थी।...

Subscribe Mahamedia Magazine to Read More...

lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 12

सूचना के आगे सोचने की शिक्षा का अन्त


सूचना के आगे सोचने की शिक्षा का अन्त

मनुष्य के समस्त संवेदन और मानवीय स्पन्दन मरने लगे हैं। मशीन हमारे अन्दर के मनुष्य को छीन रही है। इस बढ़ते सूचनावाद ने मनुष्य को अपने कैरियर के प्रति चैकन्ना तो बहुत बनाया था, किंतु चिन्तनशीलता समाप्त कर दी। हमें विश्व बाजार की प्रतियोगिता में ले जाकर तो खड़ा कर दिया, परन्तु बाजार ने विचार को पराजित कर दिया। अब व्यक्ति हो या विचार, सब कुछ वस्तु में बदल गये हैं।...

Subscribe Mahamedia Magazine to Read More...

lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 14

रिश्तों में आवश्यक है सामंजस्य


रिश्तों में आवश्यक है सामंजस्य

कभी-कभी पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन की विसंगतियों के कारण स्थिति यहाँ तक पहुँच जाती है कि ईश्वरीय रिश्ते अर्थात् माता, पिता, भाई, बहन पराये लगने लगते हैं और मानवीय रिश्ते जैसे मित्र, धर्मभाई, पड़ौसी, सहकर्मी आदि अधिक अपने और सगे बन जाते हैं तभी तो यह कहा जाता है ऐसे लोगों के द्वारा ''अपनों से तो पराये अच्छे'' ये पराये इसीलिए अधिक अच्छे लगते हैं...

Subscribe Mahamedia Magazine to Read More...

lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 18

शहीदों की चैखट चूमने का जुनून


शहीदों की चैखट चूमने का जुनून

मन्हास 2011 में जो जम्मू लौटे, तो उन्होंने अपनी ही ट्रेवल कंपनी प्रारंभ कर दी। इससे उन्हें पर्याप्त समय मिल गया कि वह अपनी इच्छा सरलता से पूरी कर सकें। उनके पास शहीदों के परिजनों की ऐसी-ऐसी कहानियां हैं कि कठोर से कठोर मनुष्य के लिए भी आंँसू थामना कठिन हो जाए।...

Subscribe Mahamedia Magazine to Read More...

lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 44

श्रीकृष्णार्पणमस्तु शृंखला


श्रीकृष्णार्पणमस्तु शृंखला

कृष्ण के सानिध्य में जीवन था। उत्साह, उमंग, आशा और विश्वास। सकारात्मक सोच था उनका। निराश से निराश व्यक्ति भी उनके संपर्क में आते ही, नवजीवन के प्रति उन्मादित हो जाता था। कृष्ण जीवंतता के प्रवाह थे। ऊर्जा। और आकर्षण। महाभारत के एक महत्वपूर्ण पात्र शिखंडी के माध्यम से हम आज कृष्ण के इस गुण को प्रत्यक्ष करने का प्रयास करेंगे।...

Subscribe Mahamedia Magazine to Read More...