अनुक्रमणिका

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महर्षि सिद्ध निर्माण योजना


महर्षि सिद्ध निर्माण योजना

कितने इनके गुण हैं? वो सारे उस अव्यक्त, निर्गुण, निराकार, शुद्ध चेतन सत्ता के प्रस्फुटन हैं। उसी का यह संसार बना है। कै से बना? कैसे वह निर्गुण निराकार सत्ता से सगुण साकार बना? ठीक उसी प्रकार जैसे यह निर्गुण निराकार रस से, बिना रंग के रस से यह फूल बन गया, ये डंठल बन गया क्या हुआ तब यह फूल बना? सबसे पहली बात तो हुई वो यह हुआ कि उस रस की सत्ता में कुछ क्रिया होना शुरू हो गयी।...

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सम्प्रदाय-आधारित लोकमंगलकारी धर्मतंत्र


सम्प्रदाय-आधारित लोकमंगलकारी धर्मतंत्र

भक्तिवाद के अभ्युदाय के कारण मूर्तिपूजा का व्यापक प्रसार इसका स्वाभाविक परिणाम था। वैदिक धर्म यज्ञप्रधान था जिसमें यज्ञों द्वारा देवताओं की उपासना की जाती थी। भक्तिवाद में भगवान की पूजा उसकी मूर्ति पर फल-फूल, नैवद्य, धूप, दीप, वाद्य, नृत्य, गीत आदि के माध्यम से होने लगी। मूर्तिपूजा का लोकमन पर इतना व्यापक प्रभाव हुआ कि बौद्ध लोग गौतम बुद्ध की भी मूर्तियां बनाने लगे जो पहले नहीं बनतीं थीं।...

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डॉ. जॉन हेग्लिन के भाषण का अनुवाद


डॉ. जॉन हेग्लिन के भाषण का अनुवाद

महर्षि पंडित वैदिक पंडितोें की ये विशेषता है कि वह इस वाणी के चारों क्षेत्रों से वह अपना कार्य करते हैं और यह सभी ध्यान और सिद्धि के आधार पर होता है कि वो चारों क्षेत्रों से कार्य करना जानते हैं और जैसे-जैसे हम इन वाणी को बोलते हैं, जो अपना पाठ करते हैं तो वह एक थके हुये मन से नहीं करते बल्कि वह वाणी के सूक्ष्म स्तर से और परा के स्तर से पाठ करते...

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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की और बढ़ते कदम


रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की और बढ़ते कदम

भारत अब रक्षा क्षेत्र में निर्यातक की बड़ी भूमिका में आ गया है। पिछले दिनों केन्द्र सरकार ने आर्टिलरी गन स्वदेशी, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, टैंकों और मिसाइलों, विस्फोटक, टैंक रोधी खानों और अन्य रक्षा उपकरणों के निर्यात के लिए अपनी अनुमति दे दी है। सरकार द्वारा कुल मिलाकर 156 रक्षा उपकरणों के निर्यात के लिए यह अनुमति दी गई है जिससे मैत्रीपूर्ण देशों को भारतीय हथियारों के निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके।

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lotus icon 6 पृष्ठ क्र. 42

श्रीमद्भगवदगीता में प्रतिपादित शान्ति प्राप्त करने के उपाय


श्रीमद्भगवदगीता  में प्रतिपादित शान्ति प्राप्त करने के उपाय

श्रीमद्भगवदगीता में वर्णित शान्ति प्राप्त करने के उपायों में अभी एक हम तीन उपायों का विवेचन कर चुके हैं। प्रस्तुत आलेख में हम चौथे उपाय की चर्चा करेंगे। अध्याय 5 के 12 वें श्लोक में कहा गया है कि निष्काम कर्मयोगी कर्मों के फल को परमेश्वर के अर्पण करके भगवत् प्राप्ति रूप शान्ति को प्राप्त होता है और सकाम पुरुष फल में आसक्त हुआ कामना के द्वारा बँधता है। यहाँ भगवत् प्राप्ति रूप शान्ति को वैष्ठिक शान्ति कहा गया है।...

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