आवरण कथा

खेल - जीवन में गति, लय, संतुलन का आधार

‘ बलराम, भीम, हनुमान, जामवंत और जरासंध आदि के नाम मल्ल-युद्ध में प्रख्यात हैं। विवाह के क्षेत्र में भी शारीरिक बल के परिणामस्वरूप स्वयवंर में भी शारीरिक शक्ति और दक्षता का प्रदर्शन किसी न किसी रूप में सम्मिलित किया जाता था। राम ने शिव-धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर और अर्जुन ने मछली की आंख का प्रतिबिम्ब देखकर प्रतियोगिता में स्वयं की क्षमता का प्रदर्शन किया था। गौतम बुद्ध स्वयं सक्षम धनुर्धर थे और रथ दौड़, तैराकी तथा गोला फेंकने आदि की स्पद्धार्ओं में भाग ले चुके थे। 'विलास-मणि-मंजरी' ग्रंथ में त्र्युवेदाचार्य ने इस प्रकार की घटनाओं का उल्लेख किया है।

"बहुत सारे खेल हैं जिनका जन्मदाता देश भारत है, किंतु कम ही भारतीय यह जानते होंगे कि कौन-कौन से खेल भारतीयों ने खोजे। किंतु अंग्रेजों और अरबों के विजयी अभियान के बाद भारत के गौरवपूर्ण इतिहास को नष्ट किया गया और स्वयं के झूठे इतिहास को महिमामंडित कर प्रचारित किया गया, क्योंकि उन्हें नया धर्म स्थापित करना था। इसलिए अंग्रेजों ने स्वयं को सभ्य और संपूर्ण विश्व को असभ्य घोषित कर दिया। ओलिंपिक इतिहास के पहले भारत में भी ओलंपिक होता था। ओलंपिक के अधिकतर खेल भारत में आविष्कृत हैं।" ’’

खेल - जीवन में गति, लय, संतुलन का आधार

'मैंने वाटरलू के युद्ध में जो सफलता प्राप्त की उसका प्रशिक्षण ईटन के मैदान में मिला।' नेपोलियन को पराजित करने वाले एडवर्ड नेल्सन की यह पंक्ति खेल के महत्त्व को बताने के लिये पर्याप्त है। खेल न मात्र हमें स्वस्थ रहने में योगदान देकर सक्षम बनाते हैं वरन् वर्तमान युग की संकीर्णतावादी सोच के विरुद्ध हमें निष्पक्ष, सहिष्णु तथा विनम्र बनाकर एक बेहतर मानव संसाधन के रूप में परिवर्तित होते हैं। खेलों की महत्व को दुनिया के प्रत्येक समाज व सभ्यता में स्वीकृति मिली है। रामायण, महाभारत से लेकर ग्रीको-रोमन दंत-कथाओं में होने वाले खेलों का वर्णन इस बात का प्रमाण है। पुन: ओलंपिक का प्रारंभ यह स्पष्ट करता है कि खेलों को संस्थानिक महत्त्व मिलता रहा है।
वर्तमान परिवेश व जीवनशैली में आज मनुष्य जब अनेक रोगों से ग्रस्त हो रहा है। ऐसे समय में खेलों का महत्त्व स्वयमेव स्पष्ट हो जाता है। खेलों द्वारा न मात्र हमारी दिनचर्या नियमित रहती है बल्कि ये उच्च रक्तचाप, ब्लड शुगर, मोटापा, हृदय रोग जैसे रोगों की संभावनाओं को भी न्यून करते हैं। इसके अतिरिक्त खेल द्वारा हमें स्वयं को चुस्त-दुरुस्त रखने में भी सहायता मिलती है, जिससे हम अपने दायित्वों का निर्वहन सक्रियतापूर्वक कर पाते हैं।
एक अच्छा जीवन जीने हेतु अच्छे स्वास्थ्य का होना बहुत आवश्यक है। जिस प्रकार शरीर को अच्छा और स्वस्थ रखने के लिये व्यायाम की आवश्यकता होती है उसी प्रकार खेलकूद का भी स्वस्थ जीवन हेतु अत्यधिक महत्त्व है। खेल बच्चों और युवाओं के मानसिक तथा शारीरिक विकास दोनों ही के लिये अति आवश्यक है। नई पीढ़ी को पुस्तक के ज्ञान के साथ-साथ खेलों में भी रुचि बढ़ाने की आवश्यकता है।


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