आवरण कथा

भावातीत ध्यान आनंद की कुंजी

‘ महर्षि जी के दर्शन का मूल आधार था- जीवन परम आनंद से भरपूर है और मनुष्य का जन्म इसका आनंद उठाने के लिए हुआ है। प्रत्येक व्यक्ति में ऊर्जा, ज्ञान और सामर्थ्य का अपार भंडार है तथा इसके सदुपयोग से वह जीवन को सुखद बना सकता है।
परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी ने अक्षय तृतीया के शुभ दिन यह प्रतिपादित किया कि भावातीत ध्यान का अभ्यास प्रतिदिन सुबह और शाम मात्र 20 मिनट करने से व्यक्ति को अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक लाभ प्राप्त होता है। उनकी कल्पना यह भी थी कि जब व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक दोनों रूप से सशक्त होगा, तभी समाज में शांति स्थापित होगी और भूतल पर स्वर्ग की स्थापना होगी। ’’

भावातीत ध्यान आनंद की कुंजी

आज भूमंडलीकरण, कम्प्यूटरीकरण, तीव्र आवागमन एवं तीव्र गति कि सूचना प्रौद्योगिकी के अभूतपूर्व विकास के फलस्वरूप व्यक्ति में मानसिक तनाव का स्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है और उसे अपना मानसिक आरोग्य बनाए रख पाना कठिन-सा हो गया है। हालांकि विश्व स्तर पर इस समस्या के निवारण पर योग मनीषियों एवं महर्षियों द्वारा विचार-विमर्श किया जा रहा है और उसके लिए तरह-तरह के सुझाव भी प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
मनोचिकित्सा के क्षेत्र में नए-नए विकास होने के बावजूद पूरब और पश्चिम सब कहीं विचारकों और चिकित्सकों ने योग द्वारा मानसिक आरोग्य की संभावनाएँ खोजने का कुछ अधिक ही प्रयास किया है। दार्शनिकों ने इस तथ्य को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया है कि मन के नियंत्रण से ही योग मार्ग में आगे बढ़ा जा सकता है। मन क्या है? इसके अपने-अपने मत एवं तर्क हो सकते हैं, किंतु मन को नियंत्रित करने की जो योग-प्रणालियाँ दार्शनिकों ने बतलाई, वह आज किसी-न-किसी रूप में लोगों के लिए कारगर सिद्ध हो रही है। अधिकांश लोग योग द्वारा मन को नियंत्रण में करते हुए व मानसिक आरोग्यता की प्राप्ति कर रहे हैं।
भारतीय विचारकों ने अनेक स्थानों पर सबमें ईश्वर, ब्रह्म और आत्मा की बातें कही हैं। उनके अनुसार, इसके अतिरिक्त कोई भी आधार सामाजिक व्यवहार को ठोस आलंबन प्रदान नहीं कर सकता। हिमालय में तपस्या करते हुए परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी भी किस प्रकार मन को साधकर मानव-जीवन को निरोगित बनाया जा सके, इस विषय पर गहरा मंथन करते रहे हैं। अंतत: उन्होंने इस संदर्भ में अपने अवगाहन से जो तत्व प्रस्फुटित किया वह कालांतर में 'भावातीत ध्यान' के नाम से अभिहित किया गया।


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